12 दिन बाद धौलीगंगा नदी किनारे मिला BRO जवान का शव - नीती घाटी आपदा से हृदय विखंडन
चमोली। नीती घाटी के तमक क्षेत्र में 10 अगस्त को आई भीषण आपदा के दौरान लापता हुए सीमा सड़क संगठन (BRO) के जवान पंकज सिंह का शव 12 दिन बाद बरामद कर लिया गया। शुक्रवार को भलागांव के समीप धौलीगंगा नदी के किनारे शव मिलने के बाद परिजनों को सूचना दी गई। जवान की मौत […]
12 दिन बाद धौलीगंगा नदी किनारे मिला BRO जवान का शव - नीती घाटी आपदा से हृदय विखंडन
चमोली। नीती घाटी के तमक क्षेत्र में 10 अगस्त को आई एक भीषण आपदा के कारण लापता हुए सीमा सड़क संगठन (BRO) के जवान पंकज सिंह का शव 12 दिन बाद बरामद किया गया। शुक्रवार को भलागांव के निकट धौलीगंगा नदी के किनारे शव मिलने की जानकारी परिजनों को दे दी गई है। जवान की असामयिक मृत्यु की खबर से परिवार और समस्त क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है।
कम शब्दों में कहें तो, यह खबर केवल एक व्यक्ति के खोने की नहीं, बल्कि मानवीय भावना और साहस की एक गहरी कहानी है जो पहाड़ी इलाकों में जीवन को और भी कठिन बना देती है। ज्यादा जानकारी के लिए यहां क्लिक करें.
आपदा के बाद से चल रहा था सर्च अभियान
10 अगस्त 2026 को अचानक आई आपदा में भारी मात्रा में मलबा और पानी आने से इलाके में व्यापक नुकसान हुआ। इसी दौरान, BRO में तैनात पंकज सिंह लापता हो गए थे। घटना के बाद से ही उनकी खोज के लिए सेना, BRO और अन्य बचाव दलों का प्रयास जारी रहा।
सेना और प्रशिक्षित डॉग की ली गई मदद
जवान की खोज में गढ़वाल स्काउट आर्मी, 20 एडी यूनिट के प्रशिक्षित जवानों ने आर्मी डॉग की सहायता भी ली। अत्यंत कठिन भौगोलिक परिस्थितियों, तेज बहाव वाली नदी और जगह-जगह जमा मलबे के बावजूद बचाव दल ने लगातार सर्च अभियान चलाया। यह दर्शाता है कि किस प्रकार भारतीय सेना और आपदा प्रबंधन दल अपनी जान पर खेलकर लोगों की जान बचाने की कोशिश करते हैं।
भलागांव के पास मिला शव
शुक्रवार को खोज अभियान के अंतर्गत भलागांव के निकट धौलीगंगा नदी के किनारे एक शव दिखाई दिया। सूचना मिलने पर BRO के जवान और पुलिस टीम मौके पर पहुंची। शव की पहचान लापता जवान पंकज सिंह के रूप में की गई। इसके बाद पुलिस ने आवश्यक कार्रवाई पूरी की। यह कार्यवाही इस मामले में पारदर्शिता और न्याय सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण है।
12 दिन बाद खत्म हुआ इंतजार
पंकज सिंह के परिवार ने उनके सुरक्षित लौटने की उम्मीदें लगाए रखी थीं, लेकिन 12 दिन में महत्वपूर्ण ढंग से सघन अभियान के बाद शव बरामद होने से तलाश अभियान का अंत हुआ। इस दौरान पंकज के परिवार ने जो मानसिक तनाव झेला है, वह उनके लिए एक गहरा दुख छोड़ गया है। इस प्रकार की आपदाएं एक बार फिर पहाड़ी इलाकों में राहत एवं बचाव कार्यों की कठिनाइयों को उजागर करती हैं, जो कभी-कभी मानव जीवन को भी प्रभावित करती हैं।
यह घटना न केवल एक जवान की जीवन की कहानी है, बल्कि यह हमें यह भी दिखाती है कि किस प्रकार प्राकृतिक आपदाएं हमारे समाज को प्रभावित कर सकती हैं। हमारी देश की सुरक्षा बलों की बहादुरी और संघर्ष प्रशंसा के योग्य है।
Breaking News, Daily Updates & Exclusive Stories - Dharm Yuddh
Team Dharm Yuddh