उत्तराखंड बना मेडिकल एजुकेशन का नया केन्द्र, धामी सरकार के नेतृत्व में रच रहा है इतिहास
धामी सरकार में चिकित्सा शिक्षा को मिला नया आयाम, मेडिकल एजुकेशन का हब बना उत्तराखंड राज्य में एमबीबीएस की 1325 सीटें, हर जिले में एक मेडिकल कॉलेज खोलने का लक्ष्य, सरकारी कॉलेजों के साथ निजी क्षेत्र का भी विस्तार मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के मार्गदर्शन व कुशल नेतृत्व में स्वास्थ्य विभाग तेजी से आगे बढ़ […] The post धामी सरकार में चिकित्सा शिक्षा को मिला नया आयाम, मेडिकल एजुकेशन का हब बना उत्तराखंड appeared first on The Lifeline Today : हिंदी न्यूज़ पोर्टल.
उत्तराखंड बना मेडिकल एजुकेशन का नया केन्द्र, धामी सरकार के नेतृत्व में रच रहा है इतिहास
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कम शब्दों में कहें तो, धामी सरकार के तहत उत्तराखंड को चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में नई ऊँचाई मिली है। राज्य में एमबीबीएस की कुल 1325 सीटें उपलब्ध कराई गई हैं और हर जिले में एक मेडिकल कॉलेज खोलने का लक्ष्य रखा गया है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के कुशल नेतृत्व में, उत्तराखंड स्वास्थ्य विभाग तेजी से विकास की ओर बढ़ रहा है। राज्य अब मेडिकल एजुकेशन का हब बनता जा रहा है। सीएम धामी के दिशा निर्देश के अनुसार, हर जिले में एक मेडिसिन कॉलेज की स्थापना की योजना बनाई गई है। स्वास्थ्य सचिव डॉ. राजेश कुमार ने जानकारी दी कि रुद्रपुर और पिथौरागढ़ में भी जल्द ही मेडिकल कॉलेज खोले जाने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।
उत्तराखंड की चिकित्सा शिक्षा की प्रगति
वर्ष 2000 में, जब उत्तराखंड का गठन हुआ, तब यह चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में काफी पीछे था। उस समय राज्य में कोई सरकारी मेडिकल कॉलेज नहीं था और डॉक्टर बनने के इच्छुक छात्रों को पड़ोसी राज्यों की ओर रुख करना पड़ता था। हालाँकि, बीते 25 वर्षों में राज्य ने चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में अतुलनीय प्रगति की है, जो अन्य राज्यों के लिए एक उदाहरण बन गई है।
स्थिति की मजबूती: सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेज
स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार के अनुसार, वर्तमान में उत्तराखंड में पांच सरकारी और चार निजी मेडिकल कॉलेज कार्यरत हैं। ये कॉलेज उच्च गुणवत्ता की स्वास्थ्य शिक्षा प्रदान कर रहे हैं, जिसमें हर साल 625 एमबीबीएस छात्र भर्ती किए जाते हैं और 238 से अधिक पीजी सीटें उपलब्ध हैं।
एमबीबीएस सीटों की बढ़ोतरी
राज्य में कुल 1325 एमबीबीएस सीटें उपलब्ध हैं। वीर चंद्र सिंह गढ़वाली राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान, हल्द्वानी मेडिकल कॉलेज और दून मेडिकल कॉलेज जैसे संस्थानों में विविध कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री धामी की नीति के अंतर्गत हर जिले में एक मेडिकल कॉलेज की स्थापना का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा गया है।
नौकरी के अवसर और मानव संसाधनों की मजबूत स्थिति
राज्य ने न केवल इमारतیں बनाईं बल्कि मानव संसाधनों को भी मजबूत किया है। हाल ही में, मुख्यमंत्री धामी ने 1,232 नर्सिंग अधिकारियों को नियुक्त किया। स्वास्थ्य विभाग ने तीन वर्षों में 173 सहायक प्रोफेसर, 56 वरिष्ठ फैकल्टी सदस्य और 185 तकनीकी कर्मचारियों की नियुक्ति की है, जिससे 22,000 से अधिक नए सरकारी नौकरियों का सृजन हुआ है।
नर्सिंग और पैरामेडिकल शिक्षा में वृद्धि
राज्य में अब 12 सरकारी और 80 से अधिक निजी नर्सिंग संस्थान हैं, जिनमें बी.एससी. और एम.एससी. नर्सिंग के लिए कुल 4,700 और 463 सीटें उपलब्ध हैं। इसके अलावा, पैरामेडिकल क्षेत्र में भी 12,000 से अधिक सीटें हैं, जो युवाओं को रोजगारोन्मुख शिक्षा प्रदान करती हैं।
दुर्गम क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच
मुख्यमंत्री धामी के नेतृत्व में, राज्य ने दुर्गम इलाकों तक स्वास्थ्य सेवाओं को पहुँचाने के लिए हेली-एंबुलेंस सेवा जैसी योजनाएं शुरू की हैं। पिथौरागढ़ और रुद्रपुर में नए मेडिकल कॉलेजों का निर्माण भी जारी है, जिससे हर जिले में एक मेडिकल कॉलेज का सपना साकार होता दिखाई दे रहा है।
मुख्यमंत्री का दृष्टिकोण
धामी ने कहा है कि राज्य सरकार उत्तराखंड को चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं का एक प्रमुख केंद्र बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उनकी प्राथमिकता गुणवत्ता वाली चिकित्सा शिक्षा उपलब्ध कराना है ताकि युवाओं को बाहर न जाना पड़े। उनके नेतृत्व में राज्य ने एक ऐसे स्वास्थ्य सेवाओं के मॉडल का निर्माण किया है, जो ना सिर्फ प्रदेश के लिए बल्कि भारत के समग्र स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण होगा।
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सादर, टीम धर्म युद्ध - प्रियंका मेहरा