उत्तराखंड में 'जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार' कार्यक्रम से 2 लाख से अधिक नागरिकों की भागीदारी

*23 दिन में जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ कार्यक्रम में दो लाख से अधिक नागरिकों की सहभागिता* *16 हजार से अधिक शिकायतों का मौके पर निस्तारण* *1,11,326 नागरिकों ने उठाया विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ* *सुशासन, संवेदनशील प्रशासन और जनसेवा की सशक्त मिसाल बन रहा जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ कार्यक्रम* मुख्यमंत्री पुष्कर […] The post 23 दिन में जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ कार्यक्रम में दो लाख से अधिक नागरिकों की सहभागिता appeared first on The Lifeline Today : हिंदी न्यूज़ पोर्टल.

उत्तराखंड में 'जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार' कार्यक्रम से 2 लाख से अधिक नागरिकों की भागीदारी
*23 दिन में जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ कार्यक्रम में दो लाख से अधिक नागरिकों की सहभागिता* *16 हजार स

उत्तराखंड में 'जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार' कार्यक्रम से 2 लाख से अधिक नागरिकों की भागीदारी

कम शब्दों में कहें तो, 'जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार' कार्यक्रम ने 23 दिन में 2 लाख से अधिक नागरिकों को जोड़कर सुशासन और संवेदनशील प्रशासन की मिसाल कायम की है।

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उत्तराखंड में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में चल रहे 'जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार' कार्यक्रम ने निश्चित रूप से राज्य के सुशासन और प्रशासन को नया दिशा प्रदान किया है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य लोगों की समस्याओं को सीधे उनके द्वार पर पहुँचाना और त्वरित समाधान प्रदान करना है। 17 दिसंबर को शुरू हुए इस कार्यक्रम के तहत अब तक 300 से अधिक शिविरों का आयोजन किया गया है, जिसमें 2 लाख से अधिक नागरिकों ने सक्रिय भागीदारी दिखाई है।

कार्यक्रम की उपलब्धियाँ

कार्यक्रम के दौरान, नागरिकों द्वारा 22,645 शिकायतें दर्ज की गईं, जिनमें से 16,000 से अधिक शिकायतों का मौके पर निस्तारण किया गया। यह आंकड़ा न केवल प्रशासन की तत्परता को दर्शाता है बल्कि जनता के शासन पर विश्वास को भी मजबूत बनाता है। इसके अतिरिक्त, विभिन्न प्रमाण पत्रों के लिए 31,070 आवेदन प्राप्त किए गए हैं, जिससे नागरिकों को अनावश्यक सरकारी दफ्तरों के चक्कर से राहत मिली है।

जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ

इस शिविरों के माध्यम से 1,11,326 नागरिकों को विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ मिला है। यह जानकारी दर्शाती है कि शासन ने न केवल चुनावी वादों को पूरा करने की दिशा में कदम बढ़ाया है, बल्कि लोगों को सशक्त बनाने का भी प्रयास किया है। नागरिकों की जरूरतों के प्रति प्रशासन की संवेदनशीलता ने एक नई उम्मीद जगाई है।

सभा से संवाद का निर्माण

इन शिविरों के माध्यम से प्रशासन और नागरिकों के बीच सीधा संवाद स्थापित हुआ है। इससे वर्षों से लंबित मामलों का समाधान संभव हुआ है और नागरिकों में शासन के प्रति विश्वास बढ़ा है। 1,97,522 नागरिकों ने अपनी समस्याओं, सुझावों और आवश्यकताओं को प्रशासन के समक्ष रखा है, जो दिखाता है कि लोगों को अब पहले से ज्यादा जानकारी और सेवा उपलब्ध हो रही है।

स्थायी समाधान के लिए प्रतिबद्धता

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी जी के निर्देशानुसार, यह कार्यक्रम केवल शिकायत निवारण तक सीमित नहीं रह गया है। बल्कि यह पात्र लाभार्थियों को योजनाओं से जोड़ने, प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल बनाने, समयबद्ध सेवाएं सुनिश्चित करने और सुशासन को जमीनी स्तर पर सशक्त करने का एक प्रभावी मंच बन रहा है। राज्य सरकार इस अभियान को निरंतर और व्यापक रूप से आगे बढ़ाने की दिशा में अग्रसर है, ताकि प्रत्येक नागरिक तक शासन की योजनाएं और सेवाएं पहुंचाई जा सकें।

निष्कर्ष

उत्तराखंड में 'जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार' कार्यक्रम ने संवेदनशील प्रशासन और जनसेवा की नई परिभाषा स्थापित की है। इस कार्यक्रम ने नागरिकों के हित में जो सकारात्मक परिवर्तन लाने का काम किया है, वह निश्चित रूप से अन्य राज्यों के लिए एक मिसाल है। राज्य सरकार का संकल्प है कि यह अभियान हर नागरिक को शासन की योजनाओं की सीधी पहुंच सुनिश्चित करने में सहायता करेगा, जिससे पारदर्शी, जवाबदेह और जनकेंद्रित शासन व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ किया जा सके।

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स्वाति कुमारी,
Team Dharm Yuddh