धारी ब्लॉक में खूनी तेंदुए का आतंक: वन विभाग की नाकामी से लोगों में दहशत
मोहना में फिर दहाड़ा आदमखोर वन विभाग की पूरी फौज भी अब तक नाकाम सीएनई रिपोर्टर, सुयालबाड़ी/नैनीताल। नैनीताल जिले के धारी ब्लॉक स्थित ग्राम पंचायत दीनी तल्ली के ‘धुरा’ तोक में एक महिला को निवाला बनाने वाला आदमखोर खूनी तेंदुआ घटना के 4 दिन बाद भी वन विभाग की पकड़ से बाहर है। मंगलवार को […] The post फिर लौटा वो खूनी तेंदुआ! धारी ब्लॉक में रोंगटे खड़े करने वाली आहट appeared first on Creative News Express | CNE News.
धारी ब्लॉक में खूनी तेंदुए का आतंक: वन विभाग की नाकामी से लोगों में दहशत
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कम शब्दों में कहें तो, नैनीताल जिले के धारी ब्लॉक में एक आदमखोर तेंदुए का आतंक बढ़ता जा रहा है। यह तेंदुआ पिछले दिनों ग्राम पंचायत दीनी तल्ली के 'धुरा' तोक में एक महिला को निवाला बना चुका है, और अब चार दिन बीत जाने के बाद भी वन विभाग इसे पकड़ने में असफल रहा है।
धारी ब्लॉक में भयावह स्थिति
ग्राम पंचायत दीनी तल्ली के 'धुरा' तोक में, आदमखोर तेंदुआ 4 दिन पहले एक महिला पर हमला कर उसे अपना शिकार बना चुका है। यह घटना स्थानीय निवासियों के लिए एक बड़ा खतरा बन गई है। तेंदुए की मौजूदगी का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इसे देखनेवाले कई गांववाले इसकी दहशत में जी रहे हैं।
वन विभाग की नाकामी
घटना के बाद वन विभाग ने उड़ीसा से तेंदुए को पकड़ने के लिए अपनी पूरी ताकत लगा दी है, लेकिन अब तक उनकी कोशिशें नाकाम साबित हो रही हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि वन विभाग की शिथिलता के कारण वे अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। इस मामले ने ना केवल गांववालों की चिंता बढ़ा दी है, बल्कि प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
स्थानीय निवासियों का संकट
धुरी तोक के निवासी अब रात को बाहर निकलने में डरते हैं। उन्हें डर है कि कहीं आदमखोर तेंदुआ फिर से किसी और को अपना शिकार न बना ले। स्थानीय नागरिकों ने वन विभाग से उचित सुरक्षा इंतजाम करने की मांग की है। उनके अनुसार, वन विभाग की निष्क्रियता के कारण उनकी जान पर बन आई है।
कब तक चलेगा यह आतंक?
इस घटना ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आदमखोर तेंदुए का यह आतंक कब समाप्त होगा। क्या वन विभाग निकट भविष्य में इस समस्या का समाधान कर पाएगा? क्या स्थानीय निवासियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी? इन सवालों का जवाब तभी मिलेगा जब वन विभाग सक्रियता दिखाएगा और इस समस्या का समाधान करेगा।
स्थानीय सरकार की भूमिका
स्थानीय प्रशासन को भी इस समस्या से ध्यानपूर्वक निपटने की आवश्यकता है। सरकार को चाहिए कि वह वन विभाग को पर्याप्त संसाधन प्रदान करे ताकि वे इस परेशान करने वाले मुद्दे का समाधान कर सकें। तेंदुए का आतंक केवल वन विभाग का नहीं, बल्कि स्थानीय प्रशासन का भी सवाल है।
इस प्रकार, जैसा कि स्थिति बनती जा रही है, स्थानीय निवासियों को एक सुरक्षित वातावरण में रहने का हक है। टिप्पणी: यह स्थिति हमें यह भी बताती है कि मानव-वन्यजीव संघर्ष एक गंभीर मुद्दा है, और हमें इसे सही दिशा में संभालने की अधिक आवश्यकता है।
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आशा है कि वन विभाग जल्द से जल्द इस समस्या का समाधान करने में सफल होगा।
सादर,
टीम धर्म युद्ध - पूजा शर्मा