नमामि गंगे योजना पर कैग की कड़ी आलोचना, 800 करोड़ की लागत के बावजूद गंगा में गिर रहा प्रदूषण

देहरादून।गंगा को निर्मल और अविरल बनाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार द्वारा चलाई जा रही महत्वाकांक्षी नमामि गंगे योजना के तहत उत्तराखंड में हुए कार्यों पर भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट ने कई गंभीर खामियां उजागर की हैं। वर्ष 2018-19 से 2022-23 की अवधि पर आधारित इस परफॉर्मेंस ऑडिट में सामने […] The post कैग की रिपोर्ट में नमामि गंगे पर सवाल, 800 करोड़ खर्च के बाद भी गंगा में गिर रही गंदगी appeared first on The Lifeline Today : हिंदी न्यूज़ पोर्टल.

नमामि गंगे योजना पर कैग की कड़ी आलोचना, 800 करोड़ की लागत के बावजूद गंगा में गिर रहा प्रदूषण

नमामि गंगे योजना पर कैग की कड़ी आलोचना, 800 करोड़ की लागत के बावजूद गंगा में गिर रहा प्रदूषण

देहरादून। गंगा को निर्मल और अविरल बनाने के लिए केंद्र सरकार ने जो महत्वाकांक्षी नमामि गंगे योजना शुरू की थी, उस पर भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की ताज़ा रिपोर्ट ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं। यह रिपोर्ट उत्तराखंड में इस योजना के अंतर्गत किए गए कार्यों का परफॉर्मेंस ऑडिट करती है और यह दर्शाती है कि साल 2018-19 से 2022-23 के बीच खर्च किए गए 800 करोड़ रुपये के बावजूद गंगा में प्रदूषण कम करने में कोई सफलता नहीं मिली है।

कम शब्दों में कहें तो, CAG की रिपोर्ट लक्ष्यों के प्रति ढीली प्रशासनिक नीति और स्थानीय समुदाय की भागीदारी की कमी को उजागर करती है। स्थानीय जलवायु और पारिस्थितिकी को ध्यान में रखते हुए यदि आरेखण और निगरानी प्रणाली में सुधार नहीं किया गया, तो गंगा में हो रही गंदगी को रोकना संभव नहीं होगा। अधिक जानकारी के लिए यहां क्लिक करें.

रिपोर्ट की प्रमुख बातें

10 मार्च 2026 को राज्य विधानसभा में पेश की गई इस रिपोर्ट में कई गंभीर खामियों का जिक्र है। इसमें बताया गया है कि कई सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) या तो बेकार पड़े हैं और कई स्थानों पर घरों से सीवर कनेक्शन भी नहीं हैं। रिपोर्ट में यह भी सुझाव दिया गया है कि कई STP अपनी क्षमता से अधिक सीवेज ले रहे हैं और कई स्थानों पर बिना उपचार के गंदा पानी सीधे गंगा में गिराया जा रहा है।

गंगा का भविष्य: एक अधूरा सपना

2008 में राज्य नदी संरक्षण प्राधिकरण द्वारा निर्धारित लक्ष्य के अनुसार 2020 तक गंगा में बिना उपचारित शहरी सीवेज के प्रवाह को रोकने का प्रयास किया गया था, लेकिन 13 साल बीत जाने के बाद भी गंगा बेसिन प्रबंधन प्लान तैयार नहीं किया गया। इसमें शामिल कुछ जिलों में जिला गंगा योजनाओं का भी अभाव है, जिसके चलते सीवरेज प्रबंधन कुशलता से नहीं हो सका है।

  • उत्तरकाशी
  • टिहरी
  • चमोली
  • रुद्रप्रयाग
  • पौड़ी
  • देहरादून
  • हरिद्वार

स्थानीय समुदाय की भागीदारी का अभाव

केंद्र सरकार की नमामि गंगे योजना का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य स्थानीय समुदायों को योजना निर्माण में शामिल करना था। हालांकि, ऑडिट में पाया गया कि राज्य गंगा समिति और क्रियान्वयन एजेंसियों ने स्थानीय लोगों को योजना प्रक्रिया से बाहर रखा। इसके परिणामस्वरूप अक्सर अनुपयोगी या गलत तरीके से बने सीवरेज ढांचे देखने को मिले हैं।

राज्य सरकार की भूमिका

CAG की रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि गंगा किनारे बसे शहरों में STP के निर्माण के लिए राज्य सरकार ने अपने संसाधनों से कोई खर्च नहीं किया है। जर्मनी की KfW बैंक से वित्तपोषित परियोजनाएं भी केवल हरिद्वार और ऋषिकेश तक सीमित रहीं, जिससे अन्य शहरों में खाली स्टैंडर्ड बने रहे।

संकटग्रस्त STP

ऑडिट के अनुसार सात गंगा नगरों में कुल 21 STP बनाए गए थे, लेकिन इनमें से कोई भी घरों से जुड़े हुए नहीं थे। उदाहरण के लिए जोशीमठ के STP को 2010 से 2017 में 42.73 करोड़ रुपये खर्च करके बनाया गया, लेकिन एक भी घर को इससे जोड़ा नहीं गया।

स्थानीय जल Quality की गिरावट

गंगा नदी के जल की गुणवत्ता में भी गिरावट देखी गई है। देवप्रयाग से हरिद्वार के बीच 93 किमी दूरी में कोलीफॉर्म बैक्टीरिया 32 गुना बढ़ गया है। रिपोर्ट में यह भी चेतावनी दी गई है कि अगले चरण में यदि सुधार नहीं किया गया, तो गंगा का जल स्तर सुरक्षित नहीं रहेगा।

CAG ने सरकार को दिए सुझाव

CAG ने अपनी रिपोर्ट में कई सुधारात्मक सुझाव दिए हैं, जिनमें शामिल हैं:

  • सभी STP का सुरक्षा ऑडिट कराया जाए।
  • सभी घरों को सीवर नेटवर्क से जोड़ा जाए।
  • STP क्षमता तय करने में वास्तविक डेटा का उपयोग हो।
  • नगर निकाय ठोस कचरा प्रबंधन की अनुमति लें।

रिपोर्ट के अनुसार, यदि सुधार नहीं किया गया तो गंगा के स्वास्थ्य में और गिरावट आने की संभावना है। यह मुद्दा हमारे पर्यावरण के लिए गंभीर चिंता का विषय बनता जा रहा है।

सिर्फ खर्च करने से कोई समाधान नहीं होगा, बल्कि एक ठोस योजना, स्थानीय भागीदारी, और नियमित निगरानी की आवश्यकता होगी।

हमेशा की तरह, यह समाचार स्थानीय और राष्ट्रीय दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बनेगा। टीम धर्म युद्ध की ओर से सभी पाठकों से निवेदन है कि वे न केवल पढ़ें, बल्कि इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर चर्चा करें।