वृश्चिक संक्रांति 2025: जानें तिथि, स्नान-दान और शुभ मुहूर्त का महत्व
KNEWS DESK- हिंदू पंचांग में सूर्य के प्रत्येक राशि परिवर्तन को संक्रांति कहा जाता है। जब सूर्य तुला राशि से निकलकर वृश्चिक राशि में प्रवेश करता है, तो इसे वृश्चिक… The post Vrishchika Sankranti 2025: कब है वृश्चिक संक्रांति? जानें तिथि, स्नान-दान और शुभ मुहूर्त का विशेष महत्व appeared first on .
वृश्चिक संक्रांति 2025: जानें तिथि, स्नान-दान और शुभ मुहूर्त का महत्व
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कम शब्दों में कहें तो, वृश्चिक संक्रांति 2025 में सूर्य के राशि परिवर्तन का एक महत्वपूर्ण पर्व है, जिसे हम धार्मिक अनुष्ठानों और स्नान-दान के लिए मनाते हैं। यह संक्रांति हिंदू पंचांग के अनुसार सूर्य के तुला राशि से वृश्चिक राशि में जाने पर होती है। आइए, इसे और अधिक विस्तार से समझते हैं।
वृश्चिक संक्रांति का महत्व
हिंदू धर्म में संक्रांति का विशेष महत्व माना गया है। यह एक अवसर है जब सूर्य की ऊर्जा और प्रभाव का परिवर्तन होता है। वृश्चिक संक्रांति के समय सूर्य जब वृश्चिक राशि में प्रवेश करता है, तब यह एक नई जीवन शक्ति का संचार करता है। इस दिन लोग पवित्र नदियों में स्नान करते हैं और दान-पुण्य का कार्य करते हैं।
कब है वृश्चिक संक्रांति 2025?
वृश्चिक संक्रांति 2025 में 16 नवंबर को मनाई जाएगी। इस दिन खासतौर पर श्रद्धालु विभिन्न पवित्र नदियों में स्नान करके और धार्मिक अनुष्ठान करके अपने घर में सुख और समृद्धि लाने का प्रयास करते हैं।
स्नान-दान का महत्व
वृश्चिक संक्रांति पर स्नान और दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन जल में तर्पण, श्राद्ध, और अन्य धार्मिक कार्य करने से व्यक्ति के जीवन में सकारात्मकता और सुख-समृद्धि का संचार होता है। इस दिन दान किए गए वस्त्र, खाद्य सामग्री और अन्य चीजें पुण्य का हेतु बनती हैं।
शुभ मुहूर्त
सूर्य के वृश्चिक राशि में प्रवेश को ध्यान में रखते हुए, इस दिन के लिए कई शुभ मुहूर्त निर्धारित किए गए हैं। विशेष स्नान और पूजा के लिए सुबह के समय का चयन सर्वोत्तम रहता है। आमतौर पर, यह समय सूर्योदय से लेकर मध्याह्न तक होता है।
वृश्चिक संक्रांति और स्वास्थ्य
इस पर्व के दौरान धर्मिक कार्यों के साथ-साथ स्वास्थ्य का ध्यान रखना भी आवश्यक है। इस दिन ताजे फलों का सेवन करने, शुद्ध खान-पान और उचित आराम लेने से शरीर में नई ऊर्जा का संचार होता है।
निष्कर्ष
वृश्चिक संक्रांति न केवल धार्मिक महत्व रखती है, बल्कि यह समाज के लिए भी एक महत्वपूर्ण अवसर है। इस दिन की विशेषता है कि यह हमें आत्म-शुद्धि और आध्यात्मिक साक्षात्कार की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर देती है।
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सादर,
टीम धर्म युद्ध, प्रियंका शर्मा