संपत्तियों के लालच में पिता के अधिकारों का उल्लंघन, डीएम की कार्रवाई से डीड रद्द
सम्पति लालच; अतिक्रमित किए पिता के अधिकार; पिता को सड़क पर ले आया पुत्र; जिला प्रशासन बना मददगार; अब डीड रद्द कूटरचित दस्तावेज से बुजुर्ग की सम्पति कराई पत्नी के नाम; डीएम ने दर्ज कराया मुकदमा; गिफ्ट डीड रद्द बडे़ बेटे ने 88 वर्षीय बुजुर्ग बीमार पिता से कूटरचित दस्तावेजों से हड़पी पिता की 2 […] The post संपत्ति लालच: बेटे ने छीने पिता के अधिकार, प्रशासन की मदद से डीड रद्द appeared first on The Lifeline Today : हिंदी न्यूज़ पोर्टल.
संपत्तियों के लालच में पिता के अधिकारों का उल्लंघन, डीएम की कार्रवाई से डीड रद्द
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कम शब्दों में कहें तो, एक बेटे ने संपत्ति के लालच में अपने बीमार पिता के अधिकारों का हनन किया, जिसे जिला प्रशासन ने अपनी कार्रवाई से रद्द कर दिया।
88 वर्षीय बुजुर्ग राजेन्द्र स्वरूप अग्रवाल ने अपनी संपत्तियों पर अपने बड़े बेटे द्वारा किए गए अतिक्रमण की शिकायत डीएम सविन बंसल से की। उनके बेटे ने कूटरचित दस्तावेजों के माध्यम से न केवल अपने पिता की दो संपत्तियों को हड़प लिया बल्कि उनके अधिकारों का भी उल्लंघन किया। अब, जिला प्रशासन ने मामले में उचित कार्रवाई करते हुए डीड रद्द करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
संपत्ति का यह विवाद कैसा था?
राजेन्द्र स्वरूप अग्रवाल ने बताया कि उनके बड़े बेटे ने उनके नाम पर बनाई गई पावर ऑफ अटॉर्नी का दुरुपयोग करते हुए उनकी संपत्तियों को अपनी पत्नी पूजा अग्रवाल के नाम गिफ्ट डीड के माध्यम से ट्रांसफर कर दिया। इस प्रकार, पुत्र ने अपने पिता को न केवल संपत्ति से वंचित किया, बल्कि यह भी सुनिश्चित किया कि उनके इलाज का इंतजाम भी खत्म हो जाए।
डीएम की सक्रियता
जब राजेन्द्र ने जिलाधिकारी से गुहार लगाई, तो उन्होंने मामले को गंभीरता से लेते हुए तुरंत कार्रवाई शुरू की। डीएम ने अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) और उप निबंधक कार्यालय को प्रकरण की जांच करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि वृद्धजनों के साथ किसी प्रकार की धोखाधड़ी या कूटरचना बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इस प्रकार, संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ FIR दर्ज कराई गई।
बुजुर्ग की स्थिति
बुजुर्ग ने बताया कि वे अपनी बीमारी के कारण इलाज के लिए अपनी बेटी के पास गाजियाबाद गए हुए थे, और इसी दौरान उनके बेटे ने धोखाधड़ी से संपत्तियों पर कब्जा कर लिया। यह स्थिति बेहद दुखद है, क्योंकि अब उन्हें अपने इलाज के लिए आवश्यक किराया भी नहीं मिल पा रहा था।
जिला प्रशासन की भूमिका
जिले का प्रशासन, जिनकी भूमिका सकारात्मक रही है, ने संज्ञान लेते हुए तुरंत कार्रवाई की। जिलाधिकारी ने कहा कि इस तरह के मामलों में वसूली पर जोर दिया जाएगा और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्यवाही की जाएगी।
निष्कर्ष
इस मामले ने संपत्ति के लालच में परिवार के भीतर होने वाले झगड़ों की जटिलता को उजागर किया है। इससे यह भी संकेत मिलता है कि कैसे एक संतान अपने बुजुर्ग माता-पिता के अधिकारों का हनन कर सकती है। जिलाधिकारी के इस पहल से उम्मीद है कि ऐसे मामलों में स्थानिक व प्रशासनिक सहयोग से न्याय संभव हो सकेगा।
इस प्रकार, समाज को एकजुट होकर यह सुनिश्चित करना चाहिए कि बुजुर्गों का सम्मान तथा उनके अधिकारों का संरक्षण होना चाहिए। क्या हम इस विषय पर अधिक जागरूक हो सकते हैं?
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सादर,
टीम धर्म युद्ध,
सुमिता शर्मा