सिरसा की रामलीला में शूर्पणखा का पतन, यमलोक तक पहुंचे खर—दूषण

सिरसा की रामलीला में उमड़ी भक्तों की भीड़ सीएनई रिपोर्टर, सुयालबाड़ी। नैनीताल जिले के सुयालबाड़ी ब्लॉक स्थित ग्राम सिरसा में आयोजित हो रही तृतीय वर्ष की रामलीला दर्शकों के बीच आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। रामलीला के मंचन को देखने के लिए प्रतिदिन बड़ी संख्या में दर्शक उमड़ रहे हैं, जिससे पूरे गाँव में […] The post सिरसा में शूर्पणखा की कट गई नाक, खर—दूषण पहुंचे यमलोक appeared first on Creative News Express | CNE News.

सिरसा की रामलीला में शूर्पणखा का पतन, यमलोक तक पहुंचे खर—दूषण
सिरसा की रामलीला में उमड़ी भक्तों की भीड़ सीएनई रिपोर्टर, सुयालबाड़ी। नैनीताल जिले के सुयालबाड़

सिरसा की रामलीला: शूर्पणखा की कट गई नाक, खर-दूषण पहुंचे यमलोक

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कम शब्दों में कहें तो, नैनीताल जिले के सिरसा गांव में आयोजित रामलीला ने दर्शकों को अपनी ओर आकर्षित किया। इस बार की रामलीला में शूर्पणखा का पात्र ऐसा केंद्र बन गया जिसमें न केवल धार्मिक भावनाओं का उबाल आया, बल्कि पर्यावरण पर भी चिंताएं जताई गईं।

रामलीला का दृश्य

सिरसा में तृतीय वर्ष की रामलीला धूमधाम से मनाई जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि इस बार की रामलीला ने खासकर युवाओं को बहुत आकर्षित किया है। रोजाना बड़ी संख्या में लोग देखने आते हैं, जिससे पूरा गांव इस धार्मिक अनुष्ठान की रंगत में रंगा हुआ है।

शूर्पणखा का पतन

रामलीला के मंचन में शूर्पणखा की नाक काटने का दृश्य दर्शकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। यह प्रसंग धार्मिक दृष्टिकोन के साथ साथ सामाजिक सन्देश भी देता है। इस दृश्य के माध्यम से यह दिखाया गया कि बुराई का अंत हमेशा होता है।

खर—दूषण का मुद्दा

रामलीला के इस महासमारोह में खर—दूषण का विषय भी हवा में तैरता रहा। कई भक्तों ने इसे यमलोक तक पहुंचाने की बात कही। पर्यावरण की दृष्टि से यह मुद्दा अत्यंत गंभीर है, और इसे ध्यान में रखते हुए ग्रामीणों ने स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को लेकर सजग रहने की आवश्यकता बताई।

निष्कर्ष

सिरसा की रामलीला ने धार्मिक, सामाजिक, और पर्यावरणीय दृष्टिकोन से एक समग्र संदेश प्रदान किया है। यह दर्शाता है कि भक्ति और पर्यावरण का क्या संबंध है। रामलीला के माध्यम से कटे हुए पात्र न केवल नकली संकटों का सामना करते हैं, बल्कि वे हमारे अंतर्दृष्टि को भी जगाते हैं।

इस रामलीला में जो भी घटित हो रहा है, वह हमें सोचने पर मजबूर करता है कि आज के युग में हमें किस रास्ते पर आगे बढ़ना चाहिए। इसके साथ ही, रामलीला का यह उत्सव निश्चित रूप से हमारे सांस्कृतिक धरोहर को जीवित रखने में सहायक सिद्ध होगा।

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सादर,
टीम धर्म युद्ध
(साक्षी शर्मा)