चंपावत में साहसिक पर्यटन को नई ऊँचाई, राफ्टिंग के बाद पैराग्लाइडिंग का उदय

खटीमा: धार्मिक और आध्यात्मिक पर्यटन के बाद अब चंपावत जिला साहसिक पर्यटन की दिशा में आगे बढ़ रहा है, जिसके लिए शासन ने प्रयास भी शुरू कर दिए है. सीएम धामी की विधानसभा चंपावत में साहसिक पर्यटन के विकास हेतु पर्यटन विभाग ने जिले के बाणासुर इलाके के बाद अब जिले के दूरस्थ डांडा ककनाई […] The post चंपावत में साहसिक पर्यटन को नई उड़ान, राफ्टिंग के बाद पैराग्लाइडिंग हब बनाने की तैयारी appeared first on The Lifeline Today : हिंदी न्यूज़ पोर्टल.

चंपावत में साहसिक पर्यटन को नई ऊँचाई, राफ्टिंग के बाद पैराग्लाइडिंग का उदय
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चंपावत में साहसिक पर्यटन को नई ऊँचाई, राफ्टिंग के बाद पैराग्लाइडिंग का उदय

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कम शब्दों में कहें तो, चंपावत जिला अब साहसिक पर्यटन की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है, जहाँ पैराग्लाइडिंग को एक मुख्य आकर्षण बनाया जा रहा है।

खटीमा: धार्मिक और आध्यात्मिक पर्यटन के लिए मशहूर, अब चंपावत जिला साहसिक पर्यटन की पहचान के रूप में उभरता दिख रहा है। राज्य सरकार ने इस दिशा में ठोस कदम उठाए हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की विधानसभा चंपावत में, पर्यटन विभाग ने बाणासुर के बाद अब डांडा ककनाई को पैराग्लाइडिंग के नए केंद्र के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया है।

साहसिक पर्यटन का नया चरण

पर्यटन सचिव धीराज गर्ब्याल की पहल पर, चंपावत जिले में आगामी गतिविधियों की कड़ी में, बाणासुर इलाके के बाद अब डांडा ककनाई क्षेत्र में फुटिंग लेने की नई योजनाएँ बनाई गई हैं। यहां छठे से लेकर 25 नवंबर और फिर 26 नवंबर से 16 दिसंबर तक पैराग्लाइडिंग का प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाया जा रहा है। इस प्रशिक्षण का उद्देश्य युवाओं को साहसिक पर्यटन में सुसज्जित करना है।

पैराग्लाइडिंग की संभावनाएँ

डांडा क्षेत्र में 'पैराग्लाइडिंग उड़ान अभ्यास' कार्यक्रम के तहत, स्थानीय युवा सोलो पैराग्लाइडिंग पायलट प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। इस प्रशिक्षण के दौरान, उन्हें 100 घंटे की उड़ान पूरी करने के बाद टैंडम (कमर्शियल) पायलट बनने के लिए सक्षम माना जाएगा। यही नहीं, विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में इस क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर की पैराग्लाइडिंग प्रतियोगिताएँ भी आयोजित की जा सकती हैं।

पैराग्लाइडिंग के प्रशिक्षकों के अनुसार, पहले फेज में प्रशिक्षित पायलटों ने बाणासुर किले के क्षेत्र से उड़ान भरी, लेकिन डांडा ककनाई की स्थलीय गतिविधियों के लिए इसे अधिक उपयुक्त पाया गया है। यहाँ पर मौसम और लैंडिंग सुविधाएँ बेहतरीन हैं, जो पैराग्लाइडिंग के सभी मानकों पर पूरी तरह खरा उतरती हैं।

वीभिन्नताओं का अनुभव

इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत, युवा पायलटों को रोमांचक अनुभव प्रदान किया जा रहा है, जिसमें वे करीब तीन घंटे तक आसमान में उड़ान भरकर अनोखे दृश्यों का लुत्फ उठाते हैं। महाराष्ट्र से आए प्रशिक्षक आकाश ने ककनाई क्षेत्र की तारीफ करते हुए कहा कि इसे पैराग्लाइडिंग के लिए अत्यंत उपयुक्त माना जा रहा है।

स्थानीय युवाओं के लिए अवसर

डांडा ककनाई का विकास साहसिक खेलों के मानचित्र पर चंपावत जिले को प्रमुखता दिलाने का अवसर प्रदान करेगा। इन परियोजनाओं के सफल कार्यान्वयन से न केवल पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि यह स्थानीय युवाओं के लिए नई अवसरों का द्वार खोलेगा।

संपूर्ण प्रशिक्षण कार्यक्रम बलवंत सिंह कपकोटी, प्रशिक्षण समन्वयक एवं साहसिक खेल अधिकारी, भीमताल के निर्देशन में संचालित किया जा रहा है। चंपावत, जो पहले से ही धार्मिक पर्यटन का केंद्र था, अब साहसिक पर्यटन में अपनी पहचान बनाने के लिए तेजी से आगे बढ़ रहा है।

इस तरह, चंपावत जिला साहसिक पर्यटन का प्रमुख केंद्र बनकर उभरने की दिशा में अग्रसर है। सरकार द्वारा शुरू की गई इस पह Initiative के साथ, साहसिक खेलों के प्रति युवा पीढ़ी का रुझान और अधिक बढ़ेगा तथा रोजगार के नए अवसर भी उत्पन्न होंगे।

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साभार: टीम धर्म युद्ध, सुमीता देवी