दिव्यांगों और कमजोर वर्ग के लिए समाधान की जिम्मेदारी अधिकारी उठाएँ: सीएम धामी

दिव्यांग व कमजोर वर्ग तक अधिकारी खुद पहुँचें, घर-घर समाधान सुनिश्चित करें: सीएम धामी जन-जन की सरकार अभियान कागज़ों तक सीमित न रहे, बने निर्णायक ‘गेम चेंजर’ –  मुख्यमंत्री समस्याएँ सिर्फ सुनी नहीं जाएँ, समाधान की प्रक्रिया का हिस्सा बने प्रशासन शिविर उत्सव की तरह हों, परिणाम केंद्रित हों, सीएम करेंगे औचक निरीक्षण फीडबैक खराब […] The post दिव्यांग व कमजोर वर्ग तक अधिकारी खुद पहुँचें, घर-घर समाधान सुनिश्चित करें: सीएम धामी appeared first on The Lifeline Today : हिंदी न्यूज़ पोर्टल.

दिव्यांगों और कमजोर वर्ग के लिए समाधान की जिम्मेदारी अधिकारी उठाएँ: सीएम धामी
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दिव्यांगों और कमजोर वर्ग के लिए समाधान की जिम्मेदारी अधिकारी उठाएँ: सीएम धामी

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कम शब्दों में कहें तो, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे दिव्यांगों, बुजुर्गों और अन्य कमजोर वर्ग के लोगों के घरों में जाकर उनकी समस्याओं का समाधान करें। यह पहल 'जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार' कार्यक्रम का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य वास्तविक लाभ सुनिश्चित करना है।

मुख्यमंत्री धामी ने बैठक के दौरान कहा कि यह अभियान केवल कागजों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसे पारदर्शिता और प्रभाविता के साथ संचालित किया जाना चाहिए। अधिकारियों को उन लाभार्थियों के घर जाकर मदद करनी चाहिए जो शिविरों तक पहुँच नहीं पा रहे हैं।

कार्यक्रम का उद्देश्य और महत्त्व

मुख्यमंत्री ने बताया कि 'जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार' का उद्देश्य जनता तक शासन को पहुँचाना है ताकि लोग महसूस कर सकें कि सरकार उनके लिए सहायक है। साथ ही, उन्होंने प्रशासन को निर्देश दिए कि समस्याएँ सिर्फ सुनी नहीं जाएँ, बल्कि तुरंत समाधान प्रस्तुत किया जाए।

सीएम धामी ने इस संदर्भ में स्पष्ट किया, "समस्याओं का समाधान हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए। अधिकारियों को मौके पर ही आवेदन करवाने और फीडबैक लेने के निर्देश दिए गए हैं। यह अभियान औपचारिकता से आगे बढ़कर, एक गेम चेंजर का रूप लेगा।"

शिविरों का आयोजन और निरीक्षण

मुख्यमंत्री ने कहा कि शिविरों का आयोजन उत्सव के स्वरूप में किया जाना चाहिए ताकि समुदाय की अधिक से अधिक भागीदारी सुनिश्चित हो सके। उन्होंने स्थानीय भाषाओं जैसे गढ़वाली और कुमाऊँनी में प्रचार-प्रसार सुनिश्चित करने पर जोर दिया, ताकि लोग आसानी से जुड़ सकें। शिविरों की सूचना पहले से व्यापक रूप से दी जानी चाहिए।

इससे यह सुनिश्चित होगा कि लोग समस्याओं के समाधान के लिए इधर-उधर न भटकें और सभी प्रश्नों का उत्तर पाकर संतुष्ट हों। सीएम धामी ने निर्देश दिए कि अगर फीडबैक संतोषजनक नहीं है तो दोबारा शिविर लगाया जाए।

महिलाओं और बुजुर्गों को प्राथमिकता

दिलचस्प बात यह है कि मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से महिलाओं, बुजुर्गों, दिव्यांगों और कमजोर वर्ग को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की बात कही। उन्होंने कहा कि इन वर्ग के लोगों को आवेदन, दस्तावेज और पात्रता से जुड़ी प्रक्रियाओं में प्रत्यक्ष सहायता दी जानी चाहिए, ताकि उन्हें किसी भी प्रकार की दिक्कत का सामना न करना पड़े।

मुख्यमंत्री ने जनप्रतिनिधियों से भी आग्रह किया कि वे सक्रिय भूमिका निभाएँ और नागरिकों से बातचीत करें। इससे न केवल समस्याएँ सुनने में मदद मिलेगी, बल्कि समाधान भी आसानी से ढूँढा जा सकेगा।

निष्कर्ष

मुख्यमंत्री धामी ने reiterated किया कि यह अभियान केवल समस्याओं की चर्चा करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए। इस अभियान का उद्देश्य सरकार को जनता के द्वार तक पहुँचाना है ताकि लोगों को महसूस हो कि सरकार उनके अधिकारों की रक्षा करने के लिए हमेशा तत्पर है।

इस प्रकार, सीएम धामी की स्पष्ट दृष्टिकोण से यह स्पष्ट है कि उनकी सरकार दिव्यांगों और कमजोर वर्ग के लोगों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है और उन्हें उचित मदद प्रदान करने हेतु सक्रिय कदम उठा रही है।

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Team Dharm Yuddh