नंदा देवी राजजात 2023 स्थगित, हिमालयी क्षेत्र में अधूरा काम बना कारण

एफएनएन, कर्णप्रयाग (चमोली) : नंदा राजजात हर 12 वर्ष में आयोजित होने वाली सबसे लंबी पैदल यात्रा है। 280 किमी लंबी यह यात्रा 20 दिन चलनी थी। लेकिन अब समिति का कहना है कि यह जात इस वर्ष नहीं हो सकेगी। उत्तराखंड का हिमालयी महाकुंभ नंदा देवी राजजात अब इस वर्ष नहीं होगी। श्रीनंदा देवी […] The post हिमालयी क्षेत्र में अधूरा काम बना बाधा, नंदा देवी राजजात नहीं होगी इस वर्ष appeared first on Front News Network.

नंदा देवी राजजात 2023 स्थगित, हिमालयी क्षेत्र में अधूरा काम बना कारण
एफएनएन, कर्णप्रयाग (चमोली) : नंदा राजजात हर 12 वर्ष में आयोजित होने वाली सबसे लंबी पैदल यात्रा है। 280 �

नंदा देवी राजजात 2023 स्थगित, हिमालयी क्षेत्र में अधूरा काम बना कारण

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कम शब्दों में कहें तो, भारत के उत्तराखंड राज्य में हर 12 वर्ष में होने वाली नंदा देवी राजजात महापर्व इस वर्ष नहीं होगी। इस निर्णय का कारण हिमालय क्षेत्र में अधूरा काम है, जो कई भक्तों और यात्रियों के लिए निराशा का कारण बना है।

क्या है नंदा देवी राजजात?

नंदा देवी राजजात, जिसे हिमालयी महाकुंभ भी कहा जाता है, हर 12 वर्ष में आयोजित की जाने वाली एक अत्यंत महत्वपूर्ण 280 किमी लंबी पैदल यात्रा है। यह यात्रा लगभग 20 दिनों तक चलनी थी, जिसमें देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु यात्रा करते हैं। इस यात्रा की कड़ी ख़ासियत यह है कि यह उत्तराखंड के पर्वतीय इलाकों से होकर गुजरती है और श्रद्धालुओं को श्री नंदा देवी की पूजा का अवसर प्रदान करती है।

स्थगन का कारण

श्रीनंदा देवी राजजात समिति के अध्यक्ष, डॉ. राकेश कुंवर ने हाल ही में प्रेसवार्ता में जानकारी साझा की कि इस वर्ष की राजजात स्थगित कर दी गई है। डॉ. कुंवर ने बताया कि हिमालयी क्षेत्र में विभिन्न निर्माण कार्य पूरे नहीं हो पाए हैं, जिसके कारण यात्रा की तैयारियों में बाधा आई। उन्होंने यह भी कहा कि समय और सुरक्षा के मद्देनजर यह निर्णय लिया गया है। यह महापर्व अब 2027 में आयोजित किया जाएगा।

प्रभावित श्रद्धालु और भक्त

इस घोषणा के बाद से श्रद्धालुओं में निराशा की लहर दौड़ गई है। कई भक्त इस यात्रा का लंबे समय से इंतजार कर रहे थे और उन्होंने अपनी तैयारी पूरी कर ली थी। खासकर, जो भक्त दूर-दूर से यात्रा करने की योजना बना रहे थे, उनके लिए यह समाचार बहुत अप्रिय है। यात्रा में शामिल होने वाले श्रद्धालु अब अगले चार वर्षों तक इस अद्भुत अनुभव का इंतजार करेंगे।

भविष्य में क्या?

हालांकि, समिति ने यह भी आश्वासन दिया है कि आगामी समय में सभी कामों को प्राथमिकता दी जाएगी ताकि भविष्य में नंदा देवी राजजात का आयोजन सफलतापूर्वक हो सके। श्रद्धालुओं से अपील की गई है कि वे धैर्य रखें और 2027 का इंतजार करें। प्रशासन का यह प्रयास है कि इस बार सभी आवश्यक प्रविधियों का पालन कर यात्रा को सुरक्षित और सफल बनाया जा सके।

उत्तराखंड के स्थानीय लोग और खासकर पर्वतीय क्षेत्रों के निवासी भी इस यात्रा को लेकर विशेष उत्साहित रहते हैं। यहां तक कि इस पर्व के दौरान स्थानीय समाज में बहुत से सांस्कृतिक कार्यक्रम विशेष रूप से आयोजित किए जाते हैं।

दूसरी ओर, कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के आयोजनों की सुरक्षा और समुचित प्रबंधन की आवश्यकता और भी बढ़ जाती है। हिमालयी क्षेत्र की प्राकृतिक चुनौतियों के कारण यात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।

अंत में, सभी श्रद्धालुओं से आग्रह है कि वे इस समय में संयम बरतें और अपनी धार्मिक आस्था को बनाए रखें। नंदा देवी की कृपा सभी पर सदैव बनी रहेगी।

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सादर,
शिल्पा अग्रवाल
टीम धर्म युद्ध