भाजपा के ‘मुन्ना’ का विवाद, सदन से सड़क तक बढ़ी टकराव की स्थिति

भाजपा के खिलाफ बंगाली समाज एक बार फिर सड़कों पर, मुस्लिम समाज भी उगल रहा आग एफएनएन, रुद्रपुर : राज्य के रजत जयंती स्थापना वर्ष पर बुलाया गया विधानसभा सत्र तीखी नोंकझोंक का हिस्सा बनकर रह गया। विपक्षी विधायकों के सदन में बात रखते ही मुन्ना सिंह चौहान बात-बात में टपकते नजर आए या फिर […] The post भाजपा के ‘ मुन्ना ‘, सदन से सड़क तक ‘ ता था थन्ना ‘, भाजपा का कटता रवन्ना appeared first on Front News Network.

भाजपा के ‘मुन्ना’ का विवाद, सदन से सड़क तक बढ़ी टकराव की स्थिति
भाजपा के खिलाफ बंगाली समाज एक बार फिर सड़कों पर, मुस्लिम समाज भी उगल रहा आग एफएनएन, रुद्रपुर : राज्�

भाजपा के ‘मुन्ना’ का विवाद, सदन से सड़क तक बढ़ी टकराव की स्थिति

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कम शब्दों में कहें तो, भाजपा के विधायक मुन्ना सिंह चौहान के विवादित बयानों ने एक नई राजनीति की स्थिति उत्पन्न कर दी है। इस बार बंगाली और मुस्लिम समुदाय उनके खिलाफ सड़कों पर उतर आए हैं।

विधानसभा सत्र में गरमागरम बहस

एफएनएन, रुद्रपुर : राज्य के रजत जयंती स्थापना वर्ष पर बुलाए गए विधानसभा सत्र ने तीखी नोंकझोंक का नजारा प्रस्तुत किया। इस दौरान विपक्षी विधायकों ने अपनी बात रखते ही भाजपा के विधायक मुन्ना सिंह चौहान बात-बात में टपकते नजर आए। उनकी बातें अक्सर विवादित रही हैं, जिससे कई बार सदन में माहौल गरम हो गया। विधानसभा अध्यक्ष ने कई बार उन्हें टोका, लेकिन उनका कहर थमने का नाम नहीं ले रहा था।

कुमाऊनी भाषा पर विवाद

मुन्ना सिंह चौहान ने अपनी ही पार्टी के विधायक मोहन सिंह के कुमाऊनी भाषा में भाषण देने पर आपत्ति जताई। यह वह भाषा है जिसे पाठ्यक्रम में शामिल करने की मांग उठाई जा चुकी है। उनके इस विवादित बयान ने लोकल मुद्दों पर बढ़ती असंतोष को उजागर किया।

बंगाली समाज की नाराजगी

हल्द्वानी के बनभूलपुरा को लेकर भी उनके बयान ने हलचल मचा दी है, जहां उन्होंने इस क्षेत्र को 'नरक' कहा। उन्होंने कहा, 'उत्तराखंड केवल उत्तराखंडियों के लिए है, कोई गैराज नहीं है।' इससे पहले भी, बंगाली समुदाय के लिए उनके बयान ने उन्हें काफी आलोचना का सामना कराया और भाजपा के कई बड़े बंगाली नेताओं ने माफी मांगते हुए इस मामले की निंदा की।

भाजपा के अंदरखाने की राजनीति

विकास नगर से पांच बार के विधायक मुन्ना सिंह चौहान भाजपा के विधायक हैं, लेकिन उन्हें त्रिवेंद्र सिंह रावत गुट से जुड़े होने का संदेह है। अवैध खनन और नगर निकाय चुनाव में आरक्षण जैसे मुद्दों पर वह सरकार की नीति से असंतुष्ट नजर आ रहे हैं। उनकी पत्नी के द्वारा जिला पंचायत चुनाव में हारने का दंश भी उन्हें चुभता है।

सड़कों पर उतरने की संभावना

बंगाली समाज के कई लोग अब मुन्ना सिंह चौहान के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं और उनकी प्रतिकृतियाँ जलाने का सिलसिला जारी है। इस नाराजगी का असर भाजपा के मिशन 2027 में बड़ी बाधा बन सकता है। यह समय है जब भाजपा को अपने कार्यकर्ताओं और समर्थकों को साधने की जरूरत है, वरना इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं।

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संपूर्ण स्थिति उभरती राजनीति के मद्देनजर भाजपा के लिए एक चेतावनी बन सकती है। क्या पार्टी बदलाव के लिए तैयार है, यह देखने वाली बात होगी।

इस विवाद से साफ है कि भाजपा अब अंतर्द्वंद्व के दौर से गुजर रही है और उन्हें अपनी छवि को बचाने के लिए कुछ करना होगा।

टीम धर्म युद्ध, नंदिता शर्मा