अंकिता हत्याकांड: दुष्यंत गौतम को हाईकोर्ट से मिली राहत, वीडियो हटाने का आदेश

एफएनएन, नई दिल्ली: उर्मिला सनावर के वीडियो के बाद अंकिता भंडारी हत्याकांड में बीजेपी के नेता दुष्यंत कुमार गौतम का नाम घसीटा गया था, जिसको लेकर दुष्यंत कुमार गौतम ने दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया था. दिल्ली हाईकोर्ट ने आज सात जनवरी बुधवार को दुष्यंत कुमार गौतम की याचिका पर बड़ा आदेश दिया. हाईकोर्ट ने दुष्यंत […] The post अंकिता हत्याकांड: दुष्यंत गौतम को राहत, हाईकोर्ट ने सोशल मीडिया से वीडियो हटाने को कहा appeared first on Front News Network.

अंकिता हत्याकांड: दुष्यंत गौतम को हाईकोर्ट से मिली राहत, वीडियो हटाने का आदेश
एफएनएन, नई दिल्ली: उर्मिला सनावर के वीडियो के बाद अंकिता भंडारी हत्याकांड में बीजेपी के नेता दुष�

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कम शब्दों में कहें तो, दिल्ली हाईकोर्ट ने हाल ही में दुष्यंत कुमार गौतम को राहत देते हुए सोशल मीडिया से उनके नाम वाले वीडियो को 24 घंटे के भीतर हटाने का आदेश दिया है। यह फैसला अंकिता भंडारी हत्याकांड से संबंधित एक विवाद पर आया है, जहां गौतम का नाम घसीटा गया है।

दिल्ली हाईकोर्ट की न्यायमूर्ति मिनी पुष्करणा की बेंच ने कहा है कि अगर दुष्यंत गौतम के नाम से संबंधित वीडियो 24 घंटे के भीतर नहीं हटाए जाते हैं, तो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को स्वयं उन्हें हटा लेना चाहिए। इसके साथ ही, कोर्ट ने आदेश दिया कि अगर फिर से ऐसे कंटेंट डाले जाते हैं, तो इसकी सूचना याचिकाकर्ता को दी जाए ताकि वे उचित कार्रवाई कर सकें।

दुष्यंत गौतम का दांव और याचिका

दुष्यंत गौतम ने अपनी याचिका में आरोप लगाया था कि सोशल मीडिया पर उनके नाम को जोड़कर एक झूठा नैरेटिव बनाया गया है, जिससे उनकी मानहानि हुई है। उनके वकील गौरव भाटिया ने अदालत में कहा कि इस वीडियो के माध्यम से उन्हें बदनाम करने का प्रयास किया जा रहा है। गौरव भाटिया ने यह भी स्पष्ट किया कि अंकिता भंडारी हत्याकांड में कभी भी उनका नाम सामने नहीं आया।

गौतम ने कहा, "इस वीडियो के चलते मुझे राजनीतिक रूप से नुकसान उठाना पड़ा है और मेरी छवि को काफी धक्का लगा है।" वह लंबे समय से राजनीति में सक्रिय हैं और ऐसे वीडियो की वजह से उन्हें गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

क्या है पूरा मामला?

यह विवाद तब शुरू हुआ जब उर्मिला सनावर ने एक वीडियो जारी किया जिसमें उन्होंने दुष्यंत गौतम का नाम अंकिता भंडारी हत्याकांड में घसीटा। गौतम ने उच्च न्यायालय का रुख करते हुए उन वीडियो और पोस्ट को हटाने की मांग की। कोर्ट ने इस पर तुरंत संज्ञान लेते हुए आदेश पारित किया।

इस बीच, उत्तराखंड में अंकिता भंडारी के हत्याकांड की जांच में साफ किया गया था कि दुष्यंत गौतम का नाम शामिल नहीं था। इस मामले में आरोपी पुलकित आर्य और उसके सहयोगियों को पहले ही ट्रायल कोर्ट ने उम्र कैद की सजा सुनाई थी।

आगे की कार्रवाई और राजनीतिक प्रभाव

अगले चरण में, यदि 24 घंटे के भीतर वीडियो हटाया नहीं गया, तो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म खुद इसे हटाने के लिए बाध्य होगा। इसकी अतिरिक्त, मामले के राजनीतिक पहलु पर सवाल उठाने वाले कई लोग भी इस पर गंभीर विचार कर रहे हैं, खासकर इस बात को लेकर कि क्या यह फेक न्यूज के माध्यम से राजनीतिक लाभ उठाने का प्रयास है।

इस प्रकार, हाईकोर्ट का यह निर्णय केवल दुष्यंत गौतम के लिए एक राहत नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक बड़ा राजनीतिक संदेश भी छिपा हुआ है। मतदान और राजनीतिक संघर्ष के समय में, जानकारी का सही प्रवाह भी महत्वपूर्ण होता है।

अंकिता भंडारी हत्याकांड ने पूरे देश का ध्यान आकर्षित किया है। इस मामले ने न केवल सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस को जन्म दिया है, बल्कि यह राजनीतिक दलों के बीच भी चर्चा का विषय बन गया है।

इस मामले में अब आगे क्या कार्रवाई की जाएगी या क्या और मुकदमे दर्ज होंगे, इसे लेकर सभी की निगाहें उच्च न्यायालय पर होंगी।

अंत में, हमें यह ध्यान में रखना होगा कि ऐसी संवेदनशील जानकारियों के साथ सदैव सतर्क रहना चाहिए।

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सादर,
टीम धर्म युद्ध,
ऋतु शर्मा