IRCTC घोटाला: लालू परिवार पर IPC 420, 120B के तहत आरोप, सीबीआई कोर्ट 10 नवंबर को फैसला सुनाएगी

एफएनएन, नई दिल्ली: बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान आरजेडी के लिए परेशानी बढ़ गई है. IRCTC घोटाला केस में राउज एवेन्यू कोर्ट ने लालू प्रसाद यादव, तेजस्वी यादव और अन्य आरोपियों के खिलाफ आरोप तय कर दिए हैं. अब इस मामले में सभी के खिलाफ मुकदमा चलेगा तो वही ज़मीन के बदले नौकरी घोटाले में आरोप […] The post IRCTC घोटाला केस में लालू परिवार पर IPC 420, 120B के तहत आरोप तय, सीबीआई कोर्ट अब 10 नवंबर को आदेश सुनाएगा appeared first on Front News Network.

IRCTC घोटाला: लालू परिवार पर IPC 420, 120B के तहत आरोप, सीबीआई कोर्ट 10 नवंबर को फैसला सुनाएगी
एफएनएन, नई दिल्ली: बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान आरजेडी के लिए परेशानी बढ़ गई है. IRCTC घोटाला केस में

IRCTC घोटाला: लालू परिवार पर IPC 420, 120B के तहत आरोप, सीबीआई कोर्ट 10 नवंबर को फैसला सुनाएगी

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कम शब्दों में कहें तो, आरजेडी के लिए बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान बड़ी मुश्किलें आ रही हैं, क्योंकि IRCTC घोटाला मामले में लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार के खिलाफ आरोप तय कर दिए गए हैं। राउज एवेन्यू कोर्ट ने अब मामले में सुनवाई करते हुए सभी आरोपियों के खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति दे दी है। सीबीआई कोर्ट अब इस मामले में 10 नवंबर को अपना फैसला सुनाएगा।

राउज एवेन्यू कोर्ट के स्पेशल सीबीआई जज विशाल गोगने ने मामले में लालू प्रसाद यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी और बेटे तेजस्वी यादव सहित 14 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए हैं। न्यायालय ने कहा कि यह मामला स्पष्ट तौर पर भ्रष्टाचार से जुड़ा है और कोर्ट ने आरोपियों की दलीलों को अस्वीकृत कर दिया है। लालू परिवार ने अपने ऊपर लगे आरोपों को गलत बताया है।

सुनवाई के दौरान, सीबीआई ने मामले में सबूतों की एक पूरी श्रृंखला पेश की, जिसमें अदालत ने माना कि लालू प्रसाद यादव की जानकारी में इस घोटाले की साजिश रची गई। गोगने ने कहा कि आरोपियों ने व्यापक साजिश में भाग लिया और इससे उनके परिवार को लाभ मिला। विशेष रूप से, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव को बेहद कम कीमत पर जमीनें प्रदान की गई थीं। कोर्ट ने लालू प्रसाद यादव को खड़े होने के लिए कहा और उन पर लगे आरोपों का उल्लेख किया।

सरकारी पक्ष और आरोप

कोर्ट ने जिन धाराओं के तहत आरोप तय किए हैं, उनमें IPC की धारा 420 (धोखाधड़ी) और धारा 120B (आपराधिक साजिश) शामिल हैं। इसके अलावा, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(2) और 13(1)(d) भी इन धाराओं में शामिल की गई हैं। हालांकि, राबड़ी और तेजस्वी पर प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट के तहत आरोप नहीं लगाया गया।

सुनवाई के दौरान अदालत ने लालू प्रसाद यादव से प्रश्न किया कि क्या वे अपने ऊपर लगे आरोपों को स्वीकार करते हैं। उन्होंने अपनी निर्दोषिता जाहिर करते हुए कहा कि यह सभी आरोप गलत हैं। राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव ने भी जालसाजी के आरोपों को खारिज किया।

क्या है मामला?

यह मामला 2004 से 2009 के बीच का है, जब लालू प्रसाद यादव रेल मंत्री थे। इस दौरान उन्होंने भारतीय रेलवे की सहायक कंपनी IRCTC के तहत पुरी और रांची के BNR होटलों के संचालन के लिए निजी कंपनियों को ठेका देने की प्रक्रिया शुरू की। सीबीआई की जांच में आरोप लगाया गया है कि इस प्रक्रिया में अनियमितताएं हुईं, जिससे सुजाता होटल्स प्राइवेट लिमिटेड को अनुचित लाभ मिला।

सीबीआई के आरोप और लालू परिवार का पलटवार

जांच एजेंसी के अनुसार, सुजाता होटल्स को ठेका देने के बदले लालू परिवार से जुड़ी एक बेनामी कंपनी को पटना में बाजार दर से बेहद कम कीमत पर जमीन दी गई। यह संपत्ति लालू परिवार की कंपनी 'डेलेगेट मार्केटिंग प्राइवेट लिमिटेड' के अंतर्गत बताई गई है। सीबीआई का आरोप है कि यह "quid pro quo" का मामला है।

लालू परिवार ने बार-बार कहा है कि यह मामला राजनीतिक प्रतिशोध का परिणाम है, और उन्‍हें विश्वास है कि उनके प्रति जारी कार्रवाई सच्चाई पर आधारित नहीं है। उनका कहना है कि यह सब चुनावी माहौल में महागठबंधन की छवि को धूमिल करने के लिए किया जा रहा है।

सामान्य सुनवाई की प्रक्रिया

सुनवाई के दौरान, कोर्ट ने कहा कि 29 मई 2025 को दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आदेश सुरक्षित रख लिया गया था। तकनीकी कारणों से सुनवाई की तिथि में बदलाव किया गया, और अब नई तिथि 10 नवंबर निर्धारित की गई है। सभी आरोपियों को कोर्ट में शारीरिक रूप से उपस्थित रहने का निर्देश दिया गया है। लालू परिवार सुनवाई के लिए दिल्ली पहुंच चुका है।

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Team Dharm Yuddh