उत्तराखंड में पीले राशन कार्ड धारकों को मिलेगा गेहूं, जानें नई व्यवस्था के बारे में

बदली व्यवस्था से 1.56 लाख परिवारों को मिलेगी राहत उत्तराखंड सरकार ने पीले कार्ड (राज्य खाद्य योजना) धारकों के लिए राशन वितरण में बड़ा बदलाव किया है। अब लाभार्थियों को केवल चावल ही नहीं, बल्कि गेहूं भी दिया जाएगा। नई व्यवस्था जनवरी से पूरे राज्य में लागू कर दी जाएगी। फिलहाल पीले कार्ड धारकों को […] The post जनवरी से पीले राशन कार्ड वालों को भी मिलेगा गेहूं appeared first on The Lifeline Today : हिंदी न्यूज़ पोर्टल.

उत्तराखंड में पीले राशन कार्ड धारकों को मिलेगा गेहूं, जानें नई व्यवस्था के बारे में
बदली व्यवस्था से 1.56 लाख परिवारों को मिलेगी राहत उत्तराखंड सरकार ने पीले कार्ड (राज्य खाद्य योजना) �

जनवरी से पीले राशन कार्ड वालों को भी मिलेगा गेहूं

बदली व्यवस्था से 1.56 लाख परिवारों को मिलेगी राहत

कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड सरकार ने पीले कार्ड धारकों के लिए राशन वितरण में महत्वपूर्ण बदलाव किया है। अब लाभार्थी केवल चावल नहीं, बल्कि गेहूं भी प्राप्त करेंगे। यह नई व्यवस्था जनवरी से पूरे राज्य में लागू होगी, जिससे करीब 1.56 लाख परिवारों को राहत मिलेगी।

वर्तमान में, पीले राशन कार्ड धारकों को महीने में केवल 5 किलो चावल दिया जाता है। परन्तु, जनवरी से यह व्यवस्था बदल जाएगी और उन्हें 2.5 किलो चावल और 5 किलो गेहूं प्रदान किया जाएगा। मतलब, परिवारों को कुल खाद्यान्न उतना ही मिलेगा, लेकिन अब उसमें गेहूं भी शामिल होगा।

अभी तक क्या मिलता था?

पूर्व में, इस योजना के तहत उपभोक्ताओं को 10 किलो चावल और 5 किलो गेहूं दिया जाता था। हालांकि, बाद में यह घटकर केवल 5 किलो चावल रह गया था। अब राज्य सरकार ने दोनों अनाजों को फिर से शामिल करने का निर्णय लिया है, हालांकि चावल की मात्रा थोड़ी कम की गई है।

आम परिवारों के लिए यह क्या बदलेगा?

इस नई व्यवस्था के अंतर्गत, गरीब और मध्यम वर्ग के लाभार्थियों को मिलाकर खाद्यान्न का सही चयन करने का अवसर मिलेगा। परिवार अब अपनी आवश्यकताओं के अनुसार चावल या गेहूं का उपयोग कर सकेंगे। इससे परिवारों की खाद्य सुरक्षा में सुधार होगा।

राज्य में लगभग 1,56,000 पीले कार्ड हैं, जिनमें कुल 5.38 लाख लोग जुड़े हुए हैं। सरकार का दावा है कि नई व्यवस्था से इन सभी परिवारों को अधिक संतुलित खाद्यान्न मिलेगा, जो उनकी आहार विविधता में सुधार लाएगा।

उत्तराखंड सरकार की इस पहल पर राज्यवासियों ने मिश्रित प्रतिक्रिया दी है। कुछ लोग इसे सकारात्मक कदम बता रहे हैं, जबकि कुछ का मानना है कि यह बदलाव विधायकों की गिरती लोकप्रियता को सुधारने की कोशिश का हिस्सा है।

सरकार द्वारा खाद्य सुरक्षा को सशक्त बनाना

यह एक प्रायोगिक उपाय है जो खाद्य सुरक्षा को सशक्त बनाने के लिए किया जा रहा है। सरकार का मानना है कि इससे न केवल लाभार्थियों का भरण-पोषण सुदृढ़ होगा, बल्कि उनकी जीवनशैली में भी सुधार होगा।

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सादर,
नीता शर्मा
टीम धर्म युद्ध