उत्तराखंड सहकारिता चुनाव: महिलाओं का नेतृत्व, 281 समितियों की कमान
*सूबे के सहकारिता चुनावों में दिखी महिला सशक्तिकरण की छाप* *महिलाओं के हाथ में रहेगी 281 सहकारी समितियों की कमान* *संचालक मण्डल में 2517 महिलाओं का दबदबा, 159 बनी उपाध्यक्ष* देहरादून, प्रदेश की सहकारी समितियों के चुनावों में महिला सशक्तिकरण की जबरदस्त छाप देखने को मिली है। प्रदेशभर की कुल 668 समितियों में से 281 […] The post सहकारिता चुनावों में महिलाओं का दबदबा: 281 समितियों की कमान महिला नेतृत्व के हाथों appeared first on The Lifeline Today : हिंदी न्यूज़ पोर्टल.
सहकारिता चुनावों में महिलाओं का दबदबा: 281 समितियों की कमान महिला नेतृत्व के हाथों
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कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड के सहकारी चुनावों में महिलाओं ने महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। कुल 668 समितियों में से 281 समितियों की कामकाजी कमान महिलाएं संभालेंगी।
देहरादून: उत्तराखंड में हाल ही में संपन्न सहकारी समितियों के चुनावों में महिलाओं के लिए एक नया अध्याय लिखा गया है। प्रदेशभर की 668 समितियों में से 281 समितियों का नेतृत्व अब महिलाओं के हाथों में होगा, जो उनके सशक्तिकरण और नेतृत्व क्षमता का प्रतिफल है। इन चुनावों में 159 समितियों में उपाध्यक्ष पद के लिए भी महिलाएं विजयी हुई हैं, और संचालक मंडल में 2517 महिलाएं निर्वाचित हुई हैं। यह संख्या न केवल सहकारिता क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी को दर्शाती है, बल्कि यह इस बात का भी प्रमाण है कि महिला नेतृत्व का एक नया मोड़ आ रहा है।
महिला सशक्तिकरण में बड़ा कदम
उत्तराखंड देश का पहला राज्य बन गया है, जहाँ सहकारिता के क्षेत्र में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था की गई है। राज्य सरकार द्वारा यह निर्णय सहकारी समितियों में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ाने के उद्देश्य से लिया गया था। इस ऐतिहासिक निर्णय ने प्रदेश की सहकारी समितियों में महिलाओं के प्रतिनिधित्व को मजबूत आधार प्रदान किया है।
सहकारी समितियों में महिलाओं की भागीदारी की तस्वीर
हालिया चुनावों का परिणाम यह दर्शाता है कि राज्य की 671 प्रारम्भिक कृषि ऋण सहकारी समितियों (एम-पैक्स) में लगभग 39 प्रतिशत यानी 2517 महिलाएं विजेता बनीं। इनमें से अल्मोड़ा में 254, बागेश्वर में 66, चम्पावत में 101, नैनीताल में 213, पिथौरागढ़ में 281, ऊधमसिंह नगर में 154, चमोली में 174, देहरादून में 173, हरिद्वार में 191, पौड़ी में 382, रुद्रप्रयाग में 138, टिहरी में 237 और उत्तरकाशी में 153 महिलाएं संचालक मंडल में निर्वाचित हुईं।
महिलाओं का नेतृत्व ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करेगा
महिलाएं केवल संचालक मंडल में ही नहीं, बल्कि विभिन्न समितियों के पदों पर भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराने में सफल रहीं हैं। यह केवल महिलाएं नहीं, बल्कि पूरे सहकारिता आंदोलन की दिशा में एक सकारात्मक बदलाव का संकेत है। 281 समितियों में से कई जनपदों में महिलाएं नेतृत्व का स्थान संभालेंगी, जैसे अल्मोड़ा में 25, बागेश्वर में 7, चम्पावत में 10, नैनीताल में 19, पिथौरागढ़ में 35, ऊधमसिंह नगर में 18, चमोली में 16, देहरादून में 15, हरिद्वार में 21, पौड़ी में 58, रुद्रप्रयाग में 14, टिहरी में 30 और उत्तरकाशी में 13 समितियां शामिल हैं।
सरकारी समर्थन और विजन
उत्तराखंड के सहकारिता मंत्री डॉ. धन सिंह रावत के अनुसार, "प्रदेश की सहकारी समितियों में महिलाओं की भागीदारी सहकारिता आंदोलन में एक नई ऊर्जा और गति का संचार करेगी। महिलाओं के नेतृत्व से सहकारिता क्षेत्र में पारदर्शिता, उत्तरदायित्व और संवेदनशीलता जैसे मूल्य और अधिक मजबूत होंगे।"
इस तरह, उत्तराखंड में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी न केवल सहकारिता के क्षेत्र में बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था, सामुदायिक विकास और नेतृत्व को भी सशक्त बनाएगी। यह एक सकारात्मक संकेत है जो यह दर्शाता है कि महिलाएं अब हर क्षेत्र में आगे बढ़ने को तत्पर हैं।
इन चुनावों के परिणाम यह भी दर्शाते हैं कि जब महिलाएं मिलकर कार्य करती हैं, तो वे सही मायने में बदलाव ला सकती हैं। सहकारिता आंदोलन में ये बदलाव एक नई दिशा की ओर ले जाने का संकेत है।
इसके अलावा, सुधारों और सक्षमता का यह सफर अभी खत्म नहीं हुआ है। आगे आने वाले समय में यह देखने योग्य होगा कि इन समीप चुनावों के परिणाम किस तरह से उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था में सकारात्मक प्रभाव डालते हैं।
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सादर, सारिका चौधरी, टीम धर्म युद्ध