हरीश रावत का एआई वीडियो के खिलाफ विरोध: पुलिस के साथ हुई गरमा-गरमी
एफएनएन, देहरादून : कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने सोशल मीडिया पर वायरल एआई से बनाए गए वीडियो के विरोध में भाजपा मुख्यालय तक एकांकी मार्च किया। इस दौरान पुलिस ने उन्हें बैरिकेड लगाकर रोक दिया। इस दौरान कार्यकर्ताओं की पुलिस के साथ तीखी नोकझाेंक भी हुई। वहीं, हरीश रावत सड़क […] The post पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने वायरल एआई से बनाए गए वीडियो के विरोध में कार्यकर्ताओं की पुलिस के साथ तीखी नोकझाेंक appeared first on Front News Network.
हरीश रावत का एआई वीडियो के खिलाफ विरोध: पुलिस के साथ हुई गरमा-गरमी
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कम शब्दों में कहें तो, पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने भाजपा मुख्यालय तक एआई से बनाए गए एक विवादास्पद वीडियो के विरोध में एकांकी मार्च किया, जहाँ पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की।
एफएनएन, देहरादून: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने हाल ही में सोशल मीडिया पर वायरल हुए एआई द्वारा निर्मित एक वीडियो के खिलाफ एकांकी मार्च का आयोजन किया। इस मार्च का उद्देश्य भाजपा के मुख्यालय पहुँचकर अपने विचारों को व्यक्त करना था, लेकिन पुलिस द्वारा बैरिकेड लगाकर उन्हें रोक दिया गया। यह स्थिति तब और गरमाई जब रावत के समर्थकों और पुलिस के बीच तीखी नोकझोंक हुई। अंततः हरीश रावत ने सड़क पर धरना देने का निर्णय लिया।
विवादित वीडियो पर हरीश रावत के आरोप
पूर्व मुख्यमंत्री ने इस वीडियो को समाज में झूठ फैलाने का एक माध्यम बताया। उनका कहना है कि यह एआई द्वारा बनाए गए वीडियो का उद्देश्य लोगों के बीच दुष्प्रचार करना है। रावत का कहना है कि इससे उनकी छवि को नुकसान पहुँचाया गया है, और वो इस अन्याय के खिलाफ खड़े होने का फैसला लेने को तैयार हैं।
बेरोजगारी और सरकार के वादे
रावत ने यह भी कहा कि प्रदेश सरकार ने बेरोजगार युवाओं से कुछ विभागों की भर्ती कराने का वादा किया था, जिसे अब तक पूरा नहीं किया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकारी नौकरी की आस लगाए युवाओं की उम्र बढ़ती जा रही है और यदि सरकार एक माह के भीतर अपने वादे को पूरा नहीं करती है, तो वो 30 जनवरी, 2026 को गांधी पार्क में 24 घंटे का धरना देंगे।
सरकार को चुनौती
हरीश रावत का यह मार्च केवल एक विरोध नहीं, बल्कि एक चेतावनी भी है कि अगर सरकार बेरोजगारी के मुद्दे पर तत्काल कदम नहीं उठाती है तो उन्हें आगामी चुनाव में इसकी कीमत चुकानी पड़ सकती है। रावत ने कहा कि उनका यह धरना और विरोध नहीं बल्कि युवाओं की आवाज उठाने के लिए एक प्रयास है, जिसमें उन्होंने अपने कार्यकर्ताओं से भी अपील की कि वे इस मुद्दे पर एकजुट होकर खड़े रहें।
निष्कर्ष
हरीश रावत का यह एकांकी मार्च और पुलिस के साथ नोकझोंक यह दर्शाता है कि राजनीति में तनाव और विरोध के स्वरुप कैसे बदल रहे हैं। आने वाले समय में यह देखना होगा कि क्या सरकार इस चुनौती का सामना कर पाएगी और क्या रावत अपने वादे के अनुसार धरना देंगे।
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सादर, टीम धर्म युद्ध - सुषमा शर्मा