कफलानी की दुखद तस्वीर: सड़क की कमी से थम गया विकास
सीएनई रिपोर्टर, कपकोट। विकास के तमाम आधुनिक दावों और चमचमाती घोषणाओं के बीच, उत्तराखंड के कपकोट स्थित बड़ेत ग्राम पंचायत के कफलानी तोक की सच्चाई दिल दहला देने वाली है। यहाँ के ग्रामीणों की ज़िंदगी सड़क के अभाव में थम सी गई है, जहाँ हर बीमारी और आपातकाल एक जीवन-मौत की जंग बन जाता है। […] The post हृदय विदारक ! सड़क नहीं, डोली ही सहारा: कफलानी में थमा विकास appeared first on Creative News Express | CNE News.
कफलानी की दुखद तस्वीर: सड़क की कमी से थम गया विकास
Breaking News, Daily Updates & Exclusive Stories - Dharm Yuddh
कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड के कपकोट स्थित बड़ेत ग्राम पंचायत के कफलानी तोक की स्थिति बेहद चिंताजनक है। यहाँ के ग्रामीण लोग इस परेशानी का सामना कर रहे हैं कि उन्हें सड़क उपलब्ध नहीं है, जिसका नतीजा उनके विकास में ठहराव और जीवन-मौत की जंग के रूप में सामने आ रहा है।
कफलानी की असली सच्चाई
सीएनई रिपोर्टर, कपकोट — कपकोट में विकास के राजनैतिक दावों और लोकलुभावन घोषणाओं के बीच कफलानी तोक की स्थिति पूरी तरह से अलग है। यहां के लोगों को मूलभूत सुविधाएं न मिल पाने के कारण कठिनाईयों का सामना करना पड़ रहा है। सड़क के अभाव में, चिकित्सा और आपात स्वास्थ्य सेवाएं पहुँच पाना लगभग असंभव हो गया है।
कफलानी के निवासी बताते हैं कि बीमारियों के समय, उन्हें बीमार व्यक्ति को डोली या सांती के सहारे अस्पताल पहुँचाना पड़ता है, जो एक अपार जोखिम और मानसिक तनाव का कारण बनता है। हर बार जब वे ऐसा करते हैं, तो जीवन-मौत का ये संघर्ष एक नई चुनौती के साथ आता है।
ग्रामीणों की आवाज़
कफलानी के निवासी रघुकुल ने कहा, "हमें सरकार के वादों पर विश्वास था, लेकिन अब हमें सच्चाई का सामना करना पड़ रहा है। हम केवल सड़क की मांग कर रहे हैं ताकि हमारी जिंदगी थोड़ी आसान हो सके।"
बड़े-बड़े विकास के दावे करने वाले नेता यहाँ के ग्रामीणों की समस्या को अनावश्यक मानते हैं। जबकि स्थानीय लोग अपने जीवन स्तर को उठाने के लिए सड़क निर्माण की मांग कर रहे हैं, जिसे अनदेखा किया जा रहा है।
विकास की दुर्दशा
भले ही सरकार विकास के दिशा में कई योजनाएं ला रही है, लेकिन कफलानी जैसे कई क्षेत्र आज भी अनदेखे हैं। वर्षों से यहाँ के ग्रामीण सड़क मार्ग की मांग करते आ रहे हैं, लेकिन प्रमाणिकता के बिना तुलना में ये सभी वादे वायस ही साबित हो रहे हैं।
एक अध्ययन से पता चलता है कि सड़कें न केवल आर्थिक दृष्टि से जरूरी हैं, बल्कि ये सामाजिक विकास और स्वास्थ्य सेवाओं के लिए भी आवश्यक हैं। कफलानी में इस तरह की स्थिति देखकर यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि यहां के लोग मौलिक सुविधाओं से वंचित रह गए हैं।
क्या है भविष्य?
विकास की चकाचौंध में स्थानीय जरूरतों का ध्यान कैसे रखा जाए, यह एक बड़ी चुनौती है। कफलानी में स्थायी विकास सुनिश्चित करने के लिए न केवल सड़क निर्माण, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं और अन्य प्रमुख सुविधाओं को भी प्राथमिकता दी जानी चाहिए। स्थानीय नेता और प्रशासन को इस दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए।
ग्रामीणों का यह संघर्ष बेशक हमें सोचने पर मजबूर करता है। क्या हमारे नेता केवल वोट पाने के लिए वादे करते हैं, या वे वास्तव में ग्रामीणों के भविष्य के लिए चिंतित हैं?
जब तक स्थानीय मुद्दों का समाधान नहीं होता, तब तक विकास केवल एक सपना रहेगा। सच्चाई यह है कि अगर कफलानी में सड़कें नहीं बनतीं, तो बाकी सभी विकास योजनाएं अधूरी रहेंगी।
अंत में, यह अत्यंत आवश्यक है कि सरकार इस दिशा में ध्यान दे और विकास की वास्तविकता को समझे। ोह, कितनी दर्दनाक स्थिति है कि हमारी सुरक्षा और स्वास्थ्य का दारोमदार सिर्फ डोलियों पर है!
برای مزید اطلاعات، دیجیٹ کریں dharmyuddh.com.
सादर,
टीम धर्म युद्ध, राधिका शर्मा